आदिवासी को ताज लेकिन चौधरी चल रहा है राज़,, छत्तीसगढ़ में तेली बजा रहे हैं थाली और ताली।

राजनीति विश्लेषण, गोल्डन कुमार:-हाल ही में हुए विधानसभा 2023चुनाव में कांग्रेस हार गई और भाजपा का सरकार बन गया,। कांग्रेस छत्तीसगढ़ में हार जाएगी इसका कोई कल्पना भी नहीं किया था,,। कांग्रेस की शिर्ष नेतृत्व की बेवकूफी कहो या लापरवाही से हार हुई है,। 2023 के विधानसभा चुनाव परिणाम मात्र एक परसेंट का वोट प्रतिशत से हार हुई है, कांग्रेस पार्टी अगर अपने घिसे _पिटे पुराने चेहरे को विधानसभा में बदल देती तो चुनाव परिणाम कुछ भी हो सकता था, जनता विधायक बदलने के चक्कर में सरकार ही बदल डाले, लोकसभा चुनाव में कुछ कहा नहीं जा सकता, विधानसभा चुनाव में लोकसभा चुनाव की अपेक्षा चुनाव प्रतिशत छत्तीसगढ़ में भी घटा है, यह बीजेपी के लिए चिंता का विषय भी है,उस समय की छत्तीसगढ़ प्रभारी यही कुमारी शैलजा,, उनको कांग्रेस ने तुरंत छत्तीसगढ़ प्रभारी से हटा दिया और छत्तीसगढ़ के नए प्रभारी के रूप में सचिन पायलट युवा नेतृत्व,, को सौंप दिया,। अब कांग्रेस फिर से,, अपना पुराना जनाधार को वापस पाने के लिए,,, आत्म मंथन करते हुए टिकट वितरण में काफी सावधानी से फैसला लिया गया,,। छत्तीसगढ़ में दो चरण के मतदान हो चुके हैं,,। महासमुंद कांकेर बस्तर राजनंदगांव,,,, छत्तीसगढ़ के कई मुख्य चेहरे मैदान में उतरे हैं।। इनका फैसला तो 4 जून को आएगा और,,बाकी तीसरा चरण का चुनाव रायपुर सरगुजा जांजगीर, रायगढ़ बिलासपुर,, 7 मई को मतदान है,। लेकिन अब भाजपा की बात करते हैं भाजपा को लोकसभा में कई शीर्ष नेतृत्व को,, धड़कनें तेज हैं अगर लोकसभा में अच्छे परिणाम नहीं आएंगे तो कई मंत्रियों की, कुर्सी दाव पर लगी हुई है,,, जिस विधानसभा सीट पर,, 2023 के परिणाम विधानसभा के और लोकसभा 2024 के परिणाम अगर मैच नहीं खाए तो उनका भी टिकट खतरे पर 2027 विधानसभा,में भी खतरे में,रह सकता है। छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह को,, विधानसभा अध्यक्ष बनाकर के संतुष्ट किया गया,, उसे समय के कई मंत्रियों को पुनः मंत्री भी नहीं बनाया गया,,। और जिनको मंत्री बनाया गया पुराने चेहरा,, जो राजनीति में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी सीनियर हैं अमित शाह से भी सीनियर हैं उन्हें उनसे पहले के विधायक हैं उनको लोकसभा रायपुर से टिकट देकर के यहां के नेतृत्व से हटाने की भी कोशिश भी है। बृजमोहन अग्रवाल अटल बिहारी वाजपेयी आडवाणी मुरली मनोहर जोशी के समय के नेता हैं। छत्तीसगढ़ में विष्णु देव साय को मुख्यमंत्री बनाया गया है,। लेकिन राजनीति विशेषज्ञों की माने कई राजनीति के पंडित हैं उनको माने तो उनको आदिवासी मुख्यमंत्री मांग के लिए चलते आ रहा था इसलिए बनाया गया है। लेकिन बात करते हैं आप चौधरी की,, जो ब्यूरोक्रेसी से छोड़कर के राजनीति में आए हैं,,। और उन पर भाजपा ने इतना बड़ा भरोसा करके फाइनेंस मिनिस्टर बनाया है। लेकिन छत्तीसगढ़ के भाजपा के नेतृत्व और संगठन पर बिल्कुल सवाल उठता है इनके झंडा उठाने वाले पुराने कार्यकर्ता को मौका नहीं मिलेगा पार्टी ब्यूरोक्रेसी से उठाकर के उनका बड़ा नेता बनाएगी। तो आने वाला समय में भविष्य में भारतीय जनता पार्टी में झंडा उठाने वाला नेता कहां रहेंगे,, जब पार्टी ब्यूरोक्रेसी से छोड़कर आए हुए नेता को इतना बड़ा पद दे रही है, तो संगठन में डंडे खाने धरना प्रदर्शन करने वाले नेता बीजेपी में कोई हैसियत ही नहीं रहेगी यह तो संगठन के लिए बहुत बड़ा विषय है यह भाजपा के संगठन को सोचना चाहिए आने वाला समय में उनके जमीन पर लड़ने वाले कार्यकर्ता कहां से पर मिलेंगे जब आप ब्यूरोक्रेसी से उठा करके इतना बड़ा नेतृत्व दे रहे हैं। तो आने वाला समय में बीजेपी में आने का मुख्य रास्ता यही हो जाएगा ब्यूरोक्रेसी से भाजपा में शामिल हो जाओ और बड़ा नेता बन जाओ। अब बात करते हैं पिछड़ा वर्ग समाज से यानी तेली समाज से नेता है जो पूर्व प्रदेश अध्यक्ष थे वर्तमान उपमुख्यमंत्री छत्तीसगढ़ के अरुण साव की,,, छत्तीसगढ़ में प्रदेश अध्यक्ष थे और साहू समाज छत्तीसगढ़ का कैडर वोट है,, साहू समाज को यही लगा होगा कि अरुण साहू मुख्यमंत्री बनेगें,, पर राजनीति में कुछ कहा नहीं जा सकता,, छत्तीसगढ़ में साहू समाज की अच्छी जनसंख्या है और पहले नंबर पर पिछड़ा वर्ग में है,, उसके बाद आता है यादव समाज, पिछड़ा वर्ग से दूसरे नंबर पर अधिक जनसंख्या वाला समाज,, चाहे बीजेपी हो या कांग्रेस हो छत्तीसगढ़ में यादव समाज का कोई नेता अभी तक हुआ है लेकिन उनको आगे बढ़े, नहीं है ना मंत्री भी बने हैं,। भले बीजेपी से भी लोकसभा से टिकट मिलता है कांग्रेस से भी मिलता है। देवेंद्र यादव को,, कांग्रेस ने बिलासपुर लोकसभा,से टिकट दिया,है,, और तो यादव समाज के भविष्य के नेता भी हो सकते हैं अगर लोकसभा जीत जाएंगे तो,।

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