चुनाव आयोग की लापरवाही से, वोट%घटा, और साहब का पसीना छूटा।

श्री गुरु ग्लोबल न्यूज:- लोकसभा चुनाव 2024 आम चुनाव,, ठीक पहले भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मन की बाद में अपील किये था,,, अपने पार्टी के पन्ना, प्रमुख एवं कार्यकर्ताओं से,, या समझो कि देश की ब्यूरोक्रेसी से,, उन्होंने कहा था आजादी का 75 वर्ष और 75% मतदान,, लेकिन वोट परसेंट 2014 लोकसभा एवं 2019 लोकसभा से लगभग 7 से 8 परसेंट की कटौती हुई है। पहले चरण की वोटिंग में, येसा एहसास हुआ कि प्रधानमंत्री मोदी अब 2024,एक्सपायरी हो गए हैं उनकी बातें ना अधिकारी कर्मचारी सुन रहे हैं ना उनके कार्यकर्ता ना उनके नेता, लेकिन चुनाव आयोग की लापरवाही से वोट परसेंट घटा है,,। तो सवाल उठता है सवाल है, भारत सरकार चुनाव आयोग लापरवाही कहां पर किया है! पहले चरण के चुनाव में कई जगह खबरें आई कई लोगों का वोटिंग आईडी में नाम ही नहीं था, वोट डालने का है लेकिन वहां नाम नहीं था, वोटिंग पर्चियां बांटने में लापरवाही हुई है,। कई ऐसे युवा आज भी मिलेंगे जिनका 18 वर्ष पूर्ण हो गया है लेकिन उनका मतदाता में नाम ही नहीं जोड़ा गया है, चुनाव घोषणा 16 मार्च2024 को करना था तो मतदाता का अंतिम प्रकाशन जनवरी के तीसरे हफ्ते में इन्होंने बहुत कम समय में चुनाव वोटिंग नाम जोड़ने और नाम हटाने का समय रखा,, अधिकतर चुनाव घोषणा होने से के कुछ दिन पहले अंतिम प्रकाशन मतदाता का होता है,। आचार संहिता 16 मार्च को लगाना था, और मतदाता का प्रकाशन और प्रक्रिया जनवरी में ही समाप्त कर दिए। तो चुनाव आयोग की लापरवाही यहां पर हुई है। मतलब फरवरी 2024 के महीना महीने भर चुनाव आयोग बस तमाशा देखती रही, यानी प्रधानमंत्री मोदी जितना योजना का उद्घाटन एवं कार्य का शिलान्यास, करना है करते रहे आचार संहिता से पहले,वोट% घटने का एक और कारण है आजादी का 75 साल हो गया लेकिन इस देश में,, जो सरकारी कर्मचारी होते हैं उनके लिए तो बैलेट पेपर का व्यवस्था कर दिया जाता है, वह लोग अन्य क्षेत्र में चुनाव ड्यूटी कार्य करने जाने से पहले वोटिंग अपना कर देते हैं। डाक पत्र के माध्यम से,,। लेकिन चुनाव आयोग के पास अभी भी यह दूर दृष्टि नहीं हुआ है,,। जो कमाने खाने के लिए मजदूर वर्ग है अपने लोकसभा क्षेत्र के लिए से बाहर गए हैं, उनके लिए डाक पत्र के माध्यम से मतदान बिल्कुल हो सकता है और चुनाव आयोग ऐसा अभी तक नहीं सोचा नहीं इसके लिए कार्य किया बल्कि उनके पास लोकतंत्र के लिए फंडिंग का कोई टेंशन नहीं है। चुनाव आयोग पैसा खर्च कर सकती है, इसके लिए व्यवस्था भी कर सकती है पर इस देश में आज तक ऐसा नहीं हुआ आजादी के 75 साल केबाद भी। क्योंकि एक प्रिंट मीडिया में खबर छपा था जो,, मतदान के प्रति जागरूक करने वाले संस्था हैं वह लोग अपील कर रहे थे जो मजदूर अपने लोकसभा क्षेत्र से बाहर कमाने खाने के लिए गए हैं, मोबाइल फोन के माध्यम से बुला रहे थे वोटिंग करने आ जाओ,, ऐसे अपील करने वाले लोगों को सोचना चाहिए उनका गाड़ी भाड़ा का खर्चा कौन देगा? समय बर्बाद होगा उसका पैसा वहां कौन वाहन करेगा??,, उन लोगों को मतदान करने का कोई दूसरा उपाय नहीं है,। बिल्कुल उपाय है डाक पत्र के माध्यम से बैलेट पेपर से उनका वोटिंग हो सकता है, इसके लिए बिल्कुल व्यवस्था हो सकता है पर चुनाव आयोग की लापरवाही सबसे बड़ी लापरवाही यहीं पर है। भारत में करोड़ो ऐसे वोटर है जो अपने क्षेत्र से बाहर रहते हैं उन लोग बहुत कम ही,वोटिंग करने, भारत भले ही अपने आप को लोकतांत्रिक देश कहती है रहती है लेकिन उन लोगों के लिए कोई ऐसा सोचा मतदान के अधिकार से उन लोग हमेशा वंचित रहते हैं। वोट परसेंट घटने का निष्पक्ष कोई,जिम्मेदार है, चुनाव आयोग है और ऐसे नियुक्ति करनेवाले केंद्र सरकार भी जिम्मेदार है दोषी है,, उनका खामियाजा तो भुगतना ही पड़ेगा।

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