सरायपाली बसना महासमुंद लोकसभा से बीजेपी को है, फंसना?!#st#sc#obc,

महासमुंद लोकसभा चुनाव पॉलिटिकल विश्लेषण, गोल्डन कुमार:-महासमुंद लोकसभा से बीजेपी की रूप कुमारी चौधरी, जो कि पिछड़ा वर्ग से अघरिया समाज से आती है,महिला प्रत्याशी है जो भाजपा ने पहली बार दिया है, वह एक प्रकार का प्रयोग के तौर पर भाजपा राजनीति नजरिया से देखा जाए तो कर रही है,, क्योंकि इतिहास में इस लोकसभा सीट से कभी भी महिला प्रत्याशी में सांसद नहीं बनी है, और कांग्रेस ने भी महिला प्रत्याशी इस सीट से अब तक नहीं दिया है, कांग्रेस ने यहां से काफी अनुभवी ताम्रध्वज साहू को यहां से मैदान में उतारा है,, इतिहास में यह सीट कांग्रेस के प्रमुख राष्ट्रीय,नेता विद्या चरण शुक्ल की यह सीट रही है, इस सीट से केंद्रीय मंत्री भी दिल्ली में बनते थे,, लेकिन छत्तीसगढ़ राज्य बनने के बाद, केवल इसमें साहू पिछड़ा वर्ग के प्रत्याशी ही बीजेपी से जीते हैं जो की चंदूलाल साहू और चुन्नीलाल,साहू, कांग्रेस के पूर्व मुख्यमंत्री छत्तीसगढ़ के उस समय कांग्रेस से भी अजीत जोगी जीते थे,,, सिटिंग विधायक चुन्नीलाल साहू का बीजेपी क्यों टिकट काटी इसका उत्तर बीजेपी के पास भी नहीं है,, क्योंकि पिछड़ा वर्ग के प्रत्याशी है और साहू मतदाता भी यहां अच्छे, संख्या हैं,, पर चुन्नीलाल साहू का टिकट क्यों,काटा गया,, उसका उत्तर यही है कि भाजपा के सर्वे रिपोर्ट में यह सीट, रेड जोन में था,, भारतीय जनता पार्टी के बहुत बड़ी सर्वे की एजेंसी,है, उनके आंकड़े में यह सीट फिट नहीं बैठ रहा था, इसलिए प्रयोग के तौर पर यहां महिला प्रत्याशी भी दिया गया होगा यह भी हो सकता है,। लेकिन चुन्नीलाल साहू का टिकट अंतिम दौर में काटा गया है, पहले दौर में अगर काटना होता तो विधानसभा चुनाव के समय कई सांसदों को विधानसभा चुनाव लड़वाई है भारतीय जनता पार्टी उसे समय चुन्नीलाल साहू को विधानसभा में भी लड़वाकर प्रयोग कर सकती थी, पर नहीं किया गया। लेकिन कांग्रेस का न्याय पत्र,,1_ महिलाओं को एक लाख रुपए सालाना,,,2 दूसरा मनरेगा मजदूरों को ₹400 रोगी,,3 कृषि सामानों में जीएसटी काम करना,,4 युवाओं की 30 लाख युवाओं की पहली भर्ती,,5_जाति जनगणना एवं आरक्षण आदिवासी शेड्यूल कास्ट एवं पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षण बढ़ाना,,6 सामाजिक न्याय,, शहरी एवं ग्रामीण श्रम अधिनियम में संशोधन,, कई ऐसे महत्वपूर्ण कांग्रेस पार्टी के जो घोषणा है इंडिया गठबंधन के हैं, जमीन स्तर पर अभी से प्रभावित दिखाई दे रही है, चुनाव का परिणाम कुछ कहा नहीं जा सकता कुछ भी हो सकता है,। आदिवासी समाज में तो आरक्षण संबंधी, विवाद है जो आदिवासी समाज एकतरफा कांग्रेस की तरफ रुख कर रही है। दलित समाज में भी आरक्षण बीजेपी के खिलाफ माहौल दिखाई दे रहा है, दलित समाज भी अगर भाजपा फिर सत्ता में आ जाएगी तो आरक्षण खत्म कर सकती है यह भावना प्रत्येक के मन में उत्पन्न हो चुकी है,। पिछड़ा वर्ग समाज में भी यही धारणा बन चुकी है, जमीन स्तर पर बीजेपी इस मुद्दे को जनता के बीच स्पष्टीकरण नहीं कर पा रही है वाकई में आरक्षण में बीजेपी का रुख क्या है एवं भाजपा के कई सांसद प्रत्याशी पहले ही दावा कर चुके हैं अगर भाजपा 400 सीट आ जाएगी तो इस बार संविधान में संशोधन करना है संविधान बदलना है। बीजेपी के जो कार्यकर्ता है नेता है, बड़े-बड़े नेता हैं तो पार्टी खिलाफ तो अनुशासन के कारण बोल नहीं पाते हैं, लेकिन बीजेपी की जो पिछड़ा वर्ग आदिवासी एवं शेड्यूल कास्ट के जो नेता है उनके अंदर भी मन में कुछ ना कुछ खिचड़ी पकते हुए दिखाई दे रहा है,। उनको भी समझ में नहीं आ रहा है आखिर बीजेपी कैसे रणनीति पर चुनाव लड़ रही है। आखिर बीजेपी आरक्षण खत्म कर करके क्या लागू करना चाहती है। और माननीय सुप्रीम कोर्ट के इलेक्टोरल बॉन्ड में बीजेपी को चंदे मिलना, एवं संवैधानिक संस्थाओं का दुरुपयोग का आरोप हमेशा विपक्ष लगा रही है,,। बीजेपी 400 सीटों का दावा कर रही है पर यह दावा राज्य स्तर पर नहीं कर पा रही है इस राज्य से इतना सीट ला रहे हैं,। छत्तीसगढ़ लोकसभा के 11 सीटों में 8 सीट पर बिल्कुल कांटे की टक्कर है,। जिसमें बस्तर कांकेर महासमुंद दुर्ग राजनांदगांव सरगुजा, रायगढ़,, इस सीटों पर आदिवासी एवं दलित पिछड़ा वर्ग मतदाता का बहुत रोल रहता है, और आरक्षण के मुद्दे एवं मजदूरों के लिए रोजगार गारंटी में जो₹400 मजदूरी दर का जो न्याय पत्र में घोषणा हुआ है यह महिला वंदन बीजेपी के योजना ₹1000 महिलाओं को प्रति महीना को भी पीछे करते दिखाई दे रही है,।

guruglobal

Learn More →

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *