अबकी बार दिल्ली सरकार से जनता चाहती है,तड़ीपार !

लोकसभा चुनाव 2024 गोल्डन कुमार का विश्लेषण:-हर राजनीतिक पार्टी का कोर होता है,, भारतीय जनता पार्टी का भी कैडर वोंट जाति का देखें,, ठाकुर पंडित लाला बनिया, इन जातियों के लोग कोई भी पार्टी में रहे उनके नेता कोई भी पार्टी में रहे लेकिन इनके जातियों का 90% समूह का वोट केवल भाजपा की ओर जाता है,। और यह परफेक्ट बात है कोई भी राजनीतिक विशेषज्ञ से पूछो यही कहते हैं और यही सही है,,। पहले इन जातियों का वोट आधा वोंट कांग्रेस को मिलता था अब पूरी तरीका से छिटक गए हैं,। और कांग्रेस जातिगत जनगणना की बात कर रही है, जिसमें आदिवासी पिछड़ा वर्ग दलित उनके लिए आरक्षण बढ़ाने की बात कर रही है,। यह कांग्रेस के न्याय पत्र में आ चुका है,,। अंदर ही अंदर भाजपा दो भागों में बटते हुए दिखाई दे रहा है मतलब भाजपा के अंदर ही भाजपा के खिलाफ माहौल दिखाई दे रहा है, हो इसलिए है कि बीजेपी की जो पिछड़ा वर्ग के जो नेता है और उनके सपोर्ट और वोट करने वाले लोग हैं रिजर्वेशन के मुद्दे पर रिजर्वेशन बढ़ाने की न्यायिक घोषणा होने के बाद, इन जातियों के लोग जो भाजपा में है वह भाजपा को अंदर ही अंदर वोट नहीं करने एवं हराने की ठांन लिए है,,। गुजरात में ठाकुर नाराज है पश्चिमी यूपी में जाट नाराज हैं, ठाकुर गुजरात में और उनके भाजपा के एक कैंडिडेट गुजरात से नरेंद्र मोदी के सबसे करीबी, पुरुषोत्तम रुपाला के द्वारा क्षत्रिय समाज के स्त्रियों पर किया गया एक सभा में टिप्पणी,। पुरुषोत्तम रुपाला ने कहा ठाकुर समाज की स्त्रियां अंग्रेजों के समय ठाकुर समाज रोटी और बेटी का रिश्ता अंग्रेजों से रखते थे,, और सोशल मीडिया में भी ठाकुर समाज पर आरोप लगता है कि मुगलों के साथ भी यही रिश्ता था पर बीजेपी का आईटी सेल इन पर किसी भी प्रकार का डिफेंस नहीं करता, ठाकुर समाज,, सभा करते हुए ,, उत्तर प्रदेश में एवं कई जगह ठाकुर समाज के बड़े नेता जनरल बीके सिंह एवं कई नेताओं का टिकट भाजपा कट चुकी है, इस बात में राजपूत समाज में काफी नाराजगी है, पुरुषोत्तम रुपाला का टिकट काटने की मांग कर रही है, नहीं होने पर समाज का वोट भाजपा की ओर नहीं देने के बाद हो रहा है। ठाकुर समाज की महिलाओं म औ टिप्पणी पर काफी आक्रोश है, पिछड़ा वर्ग में जो समाज कुछ मुख्य धारा में आ चुके हैं कुर्मी यादव जाट केवट, पटेल,, यह इनका समाज का वोट आरक्षण रिजर्वेशन बढ़ाने के मुद्दे पर भाजपा के खिलाफ माहौल है,। और भाजपा के कई नेता 400 सीटों पर सीधा कहते हैं संविधान बदलना है,, संविधान बदलना है मतलब आरक्षण सीधा खत्म,, तो पिछड़ा वर्ग के नेता क्या बीजेपी को चुनाव में जीतेंगे यह सबसे बड़ा सवाल है, और साथ ही किसान दलित आदिवासी,, बेरोजगार और अग्नि वीर और पेपर लिखकर मुद्दे पर जहां बीजेपी यूपी और बिहार में चुनाव जीती थी वहां की युवाओं में काफी नाराजगी है, और सबसे अधिक 83% बेरोजगारी का आंकड़ा आया है, जो 40 साल का भारत का राजनीतिक इतिहास में बेरोजगारी सबसे अधिक दर पर है। भाजपा 2014 में जीती 2019 में फिर मौका मिल गया, 2021 में होने वाला जाति जनगणना को भाजपा शासन नहीं करवाया, इसका मुद्दा वास्तविक मुद्दा माहौल चल रहा है,, 10 सालों का एंटी इनकंबेंसी भाजपा के खिलाफ है,, भाजपा भले ही 400 सीटों का दावा कर रही है पर यह अंदर ही अंदर देखने पर हर राज्यों की तुलना करने पर समझ में आता है किस राज्य में यानी पूरे भारत में आप 80% सीट जीत जाएंगे यह तो बिल्कुल समझ में नहीं आ रहा,है,। दक्षिण भारत में भाजपा बिल्कुल सबसे कमजोर स्थिति में है, पूर्व भारत में मणिपुर हिंसा के बाद वहां भी स्थितियां खराब है पश्चिम बंगाल में और खराब है यूपी और बिहार में युवा बेरोजगार और कई मुद्दों पर वहां भी अच्छा स्थिति नहीं है, भाजपा का गढ़ गुजरात और राजस्थान में भी स्थिति खराब है, दिल्ली और पंजाब और कश्मीर में तो भाजपा पहले से ही कमजोर है तो 400 सीट कैसे जीतेंगे,।। कहां से जीतेंगे कैसे जीतेंगे वह भी समझ में नहीं आ रहा है इसका मुख्य कारण है मोदी जी का चेहरा भाजपा चुनाव लड़ रही है क्या भाजपा में सामूहिक नेतृत्व में चुनाव नहीं लड़ सकती क्या मोदी जी भाजपा से भी बड़े हो गए हैं। कांग्रेस के न्याय में महिलाओं के लिए एवं किसानों के लिए जीएसटी मुक्त समान, एवं 30 लाख युवाओं की नौकरी,, किसानों के लिए मनरेगा को एग्रीकल्चर से जोड़ना एवं मनरेगा मजदूरी दर₹400 है प्रति दिहाड़ी प्रति दिन मजदूरी का घोषणा यह चुनाव को प्रभावित करने वाला है।

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