शतरंज की तरह फंस गया राजिम विधानसभा कांग्रेस टिकट की पेंच!

Shri Guru global news New Delhi:-छत्तीसगढ़ के सबसे vip विधानसभा सीट, छत्तीसगढ़ की प्रयागराज कहे जाने वाली राजिम विधानसभा,,, छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से लेकर के दिल्ली तक इस सीट को लेकर माथापच्ची हो रही है,,, यहां छत्तीसगढ़ के नेताओं में इस सीट के टिकट वितरण को लेकर के काफी आत्म मंथन और चिंतन किया जा रहा है, राजिम विधानसभा सीट को लेकर एक राय अभी तक नहीं बन पाया है,,, और छत्तीसगढ़ के प्रत्येक सीटों पर दिल्ली की नजर है, छत्तीसगढ़ के नेताओं को राय लेकर के सीधे दिल्ली से फैसला हो रहा है, फिलहाल छत्तीसगढ़ के 30 विधानसभा सीटों की सूची जारी किया गया है जिसमें 8 विधानसभा के सिटिंग विधायकों का टिकट काटा गया है,,, राजीव विधानसभा एक परिवर्तन करने वाली विधानसभा सीट है, अभिभाजित मध्य प्रदेश से पहले भी यहां की इतिहास देखें जनता परिवर्तन का, इसी सीट से मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे स्वर्गीय श्याम चरण शुक्ल, को भी जनता पार्टी के पवन दीवान के हाथों हार मिली है,, लेकिन दूसरा पक्ष आया है कि कांग्रेस से यहां पिछड़ा वर्ग उम्मीदवार जीते भी इतिहास में अपने हाथों ले चुकी है, वह है जीवनलाल साहू इस सिट से कांग्रेस के विधायक भी बन चुके हैं,,, राजनीति के पंडित और जानकार भी कहते हैं यह शुक्ला परिवार की विरासत की सीट है स्वर्गीय पंडित श्यामा चरण शुक्ल की कर्मभूमि है इस सीट में विधायक सिटिंग विधायक का टिकट काटना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन है,,,, लेकिन 2023 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस काफी आत्म मंथन टिकट वितरण में किसी भी प्रकार की लापरवाही और किसी भी प्रकार का जोखिम लेने के मूड में बिल्कुल दिखाई नहीं दे रही है, क्योंकि विधानसभा चुनाव में एक-एक सीट अहम होती है सरकार बनाने के लिए किसी भी प्रकार की मनोवैज्ञानिक कमजोरी ना रहे ऐसा बिल्कुल देख रही है विधायकों का टिकट कट रहा है उनको आने वाला लोकसभा में भी मौका देने की बात कह करके संभावना भी किया जा रहा है, 2024 में आम चुनाव से पहले,,, विधानसभा चुनाव के अच्छे परिणाम,,, मनोवैज्ञानिक रूप से कार्यकर्ताओं को मजबूती के लिए एवं नेताओं के लिए कोई भी जोखिम उठाना नहीं चाहता,,,यहां पर विपक्षीय पार्टी बीजेपी पहले से पिछड़ा वर्ग कैंडिडेट तय कर लिए हैं,, जो सिटिंग विधायक है सामान्य वर्ग का है,,, वर्तमान की स्थिति और राजनीति को देखें तो कांग्रेस फिलहाल पिछड़ा वर्ग आदिवासी और दलित की जातिगत राजनीति में बिल्कुल आ गई है,, और ऐसे छोटे-छोटे मुद्दे बड़े बन जाते हैं और विपक्ष के सामने किसी भी प्रकार का मनोवैज्ञानिक दबाव ना रहे ऐसा बिल्कुल कर सकती है, क्योंकि राजीव विधानसभा की मध्य प्रदेश से नया राज्य छत्तीसगढ़ बनने के बाद राजिम विधानसभा एक बार लगातार कोई विधायक नहीं बना है यह इतिहास है और इस पेंच को तोड़ने के लिए किसी भी प्रकार का नया कदम भी कांग्रेस पार्टी उठा भी सकती है ऐसी संभावना भी लिया जा रहा है,1998 में यहां से अमितेश शुक्ल पहली बार विधायक बने पहली बार मंत्री बने, दोबारा फिर टिकट मिले तो 2003 के विधानसभा चुनाव में चंदूलाल साहू से हार गए,, फिर 2008 में फिर टिकट मिला तो संतोष उपाध्याय से जीत गए, फिर 2013 में संतोष उपाध्याय से हार गए, फिर 2018 में संतोष उपाध्याय से जीत गए काफी अंतर से बस, लेकिन 2023 का समीकरण अभी पेंडिंग है फैसला 3 दिसंबर 2023को जनता के द्वारा आएगी,?

राजनीति विशेषज्ञ गोल्डन कुमार की स्पेशल रिपोर्ट:-समाजवादी सोशलिस्ट की तरह छत्तीसगढ़ की राजनीति की इस बार समीकरण राजनीति करने वालों को चिंतन मंथन में इसलिए डाल दिया है, क्योंकि छत्तीसगढ़ चुनाव में यहां की जातिगत सामाजिक राजनीति करने वाली प्रमुख पार्टियों का गठबंधन हो चुका है गोंडवाना गणतंत्र पार्टी और बहुजन समाज पार्टी, दोनों मिलकर के चुनाव लड़ रहे हैं, छत्तीसगढ़ जनता कांग्रेस भी लड़ रही है, अभी-अभी राष्ट्रीय पार्टी बनी आम आदमी पार्टी भी लड़ रही है,,, इन वोटो की तरह राष्ट्रीय प्रमुख पार्टी छत्तीसगढ़ की कांग्रेस और भाजपा अपने कोर, वोट इन पार्टियों पर ना छिटके के अपने और बना रहे इस समीकरण को देख रही है,,, क्योंकि रूलिंग पार्टी सरकार में रहने पर कई प्रकार के एंटी इनकंबेंसी भी रहती है,, टिकट वितरण में इसलिए काफी आत्म मंथन और चिंतन हो रहा है, ऐसा उम्मीदवार मिले जिसमें किसी भी प्रकार का समीकरण जातिगत समीकरण ना बिगड़े,, ऐसा उम्मीदवार राष्ट्रीय पार्टी देना चाहती है जो इन सभी का समीकरण को तोड़ सके और सभी को अपने और आकर्षित कर सके,,, कुछ नया कर सके, कुछ नया दे सके राजनीति में कुछ भी हो सकता है कुछ भी फैसला हो सकता है कुछ कहा नहीं जा सकता। कांग्रेस पार्टी कई सिटिंग विधायकों का टिकट कट चुकी है समीकरण को देखते हुए एवं सर्वे रिपोर्ट को देखते हुए। एवं विधायकों का फीडबैक देखते हुए,

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