सरकार की एक बाल भी नहीं उखाड़ पाएंगे सरकारी कर्मचारी?

सरकार की एक बाल भी नहीं उखाड़ पाएंगे कर्मचारी ग्लोबल न्यूज़ की साइकोलॉजिकल थ्योरी:_पहले इतिहास में सरकारी कर्मचारियों के दबाव में काम करते थे अब कई चीजें बदलाव हो चुकी है सिस्टम ऑनलाइन हो चुका है ज्यादा प्रभावित नहीं कर सकते और जितना प्रभावित कर सकती है सरकार उसे पहले से ही दूर करने की कोशिश में लग गई है, उदाहरण के लिए छत्तीसगढ़ में पटवारियों का हड़ताल, सरकार ने आदेश जारी किया है किसी भी दस्तावेज में जाति प्रमाण पत्र एवं अन्य पटवारी के बिना भी हो सकती है, उससे पहले पंचायत सचिव का हड़ताल बेनतीजा रहा, रोजगार सहायक का हड़ताल बेनतीजा रहा,, अब सरकार को समय आ चुका है आने वाला समय में सरकार ठेकेदारी से बहुत काम करा सकती है यानी, आउटसोर्सिंग से,, और सरकार को इससे बचत भी हो सकती है,, कई काम हो सकते हैं मात्र एक सरकारी कर्मचारी के निगरानी में सारे काम हो सकते हैं,, कर्मचारियों से सरकार को मालूम हो चुका है ज्यादा प्रभावित नहीं कर सकते चुनाव में भी इनका मत इधर उधर जाएगा, मान लो जाय नोटा में भी बटन दब आएंगे तो भी तो कोई मतलब नहीं है,,, आप रेगुलर सरकारी कर्मचारी का तनखा देखें तो अपेक्षाकृत किसानों से कई गुना आमदनी से अधिक वृद्धि किया जा चुका है,, भारत की आजादी के बाद, प्रत्येक दशक जनगणना और आर्थिक भारत की प्रोग्रेस के हिसाब से कर्मचारियों का आमदनी एवं उनकी तनखा में काफी वृद्धि किया जा चुका है, उस समय सोना के दाम क्योंकि सोना के दाम से ही रिजर्व बैंक और नोटों का मूल्यांकन होता है भारतीय मुद्रा का मूल्यांकन होता है,, उस समय किसानों के 1 कुंटल अनाज में कितना ग्राम सोना आता था और उस समय कर्मचारियों की तनखा कितनी थी और आज अपेक्षाकृत कितनी है तुलना करें तो कर्मचारियों की ज्यादा है सरकारी कर्मचारियों की बहुत अधिक ज्यादा है,, सरकारी कई काम आप ठेकेदारी से शुरू कर चुकी है, आउटसोर्सिंग से संविदा से कई काम हो जा रहे हैं तो सरकार रेगुलर क्यों करेगी, आने वाला समय में सरकारी नौकरी अब नही के बराबर रहेगी कई काम आउटसोर्सिंग और ठेकेदारी से हो सकती है,, पटवारी का कई काम ठेकेदारी से हो सकता है अपेक्षाकृत अन्य कर्मचारियों का काम भी ठेकेदारी से हो सकता है आने वाला समय में,, ठेकेदारी से सरकार को बचत है पैसा कम लग सकता है, और उनकी जवाबदारी भी खत्म,, और आने वाला समय में अनुकंपा नियुक्ति के लिए भी रिटायरमेंट की समय सीमा भी सरकार 50 साल कर सकती है,, यह सारे थ्यूरी ग्लोबल न्यूज़ संपादक गोल्डन कुमार की दृष्टि है,, इससे यही होगा रोजगार वृद्धि होगी नए लोगों को मौका मिलेगा और इससे अनुकंपा नियुक्ति से भी कर सरकार को छुटकारा मिल सकती है, यानी आत्मनिर्भर भारत,,

भारत के पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा था पैसा पेड़ पर नहीं उगते,, बहुत अर्थशास्त्री है विद्वान हैं, इनकी तनख्वाह मांग के हिसाब से बढ़ाते गए तो जनता को ही प्रभावित होगी जनता पर बोझ ही पड़ेगा। लेकिन वेतन विसंगति है काम के आधार पर वेतन बहुत विसंगति है पद के हिसाब से बहुत तनखा मिलता है, सारे कर्मचारियों को चाहिए फिर से वेतन आयोग बने अन्य कर्मचारियों को ज्यादा मिलता है बराबर हो समानता का अधिकार हो भेदभाव ना हो सारे कर्मचारियों इस मांग को करना चाहिए जो जायज है, या शासन और प्रशासन को बीच का रास्ता निकालने का सुझाव देना चाहिए।

और इनको देखो सबसे अच्छी मजे की नौकरी है 11:00 बजे स्कूल जाना है 4:00 बजे छुट्टी फिर भी इनको मांग कर रहे हैं,, काम के अपेक्षा इनको पैसा कम पड़ रहा है। इनको तो रविवार को छुट्टी फिर भी पैसा मिलता है, ग्रीष्मकालीन छुट्टी में पैसा मिलता है, सरकारी छुट्टी एवं शनिवार की छुट्टी एवं त्यौहार की छुट्टी देखें तो इनको मात्र महीना में 20 दिन काम करना है फिर भी,सरकारी स्कूल के बच्चे फेल हो फिर भी इनको पैसा मिलता है पढ़ाई लिखाई में ठिकाना नहीं फिर भी पैसा मिलता है। सबसे पहले सरकार को तो शिक्षा डीपार्टमेंट को आउटसोर्सिंग और ठेकेदारी कर देना चाहिए। लेकिन इनका यही सफाई रहता है इनकी नौकरी में बाहर से कोई कमाई नहीं होती इसलिए परेशानी होती है अन्य कर्मचारियों में बाहर से यानी घूस लेकर के थोड़ा बहुत पैसा मिल जाता है लेकिन इन लोगों को नहीं मिल पाता। और आपत्ति इसी बात पर रहती है।

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