चैन हार्वेस्टर किसानों के साथ कर रहा है,आर्थिक शोषण?

छत्तीसगढ़ में फिलहाल बेमौसम बारिश हुई है, खेत गीला हो गया है, पहिया,हार्वेस्टर चल नहीं सकता, मजदूर कम मिलते हैं गर्मी के दिनों में, और इसका गलत फायदा उठाने का काम चैन हार्वेस्टर वाले शुरू कर दिए हैं। ग्राम मड़ेली में एक किसान का, उसका 2 एकड़ में 22 हजार रुपए का धान हुआ, और चैन हार्वेस्टर का बिल ₹18000 का बना, तो किसान करजा में नहीं रहेंगे तो क्या बेनिफिट में चलेंगे! उनका खेतों का जोताई मजदूरी खर्चा बुवाई जोड़ेंगे तो, ऐसा ही ग्राम पक्तियां में घंटा में बिल बनता है तो उनका 10 एकड़ में 70000 हजार,का चैन हार्वेस्टर वाला का बिल बन गया। पहिया वाला हार्वेस्टर किसानों से एकड़ हिसाब से भुगतान वसूल ता है वह ठीक है, 1 एकड़ धान काटने में 8 से 10 लीटर डीजल लग जाता है और वाहन मालिक को सही लाभ भी होता है और किसानों को भी, वह एक प्रकार का ठीक भी है।

चैन हार्वेस्टर किसानों से एक घंटा में 35 सौ से ₹4000 ले रहे हैं, कोई भी इंजन किलोमीटर घंटा से चलता है और इनका डीजल कितना का लगता होगा कितना लेना चाहिए वह कौन तय करेगा? सरकार शासन और प्रशासन तो तय नहीं कर सकती, क्योंकि चैन हार्वेस्टर खरीदने में टैक्स लगता है भारी-भरकम, और डीजल में भी एक्साइज ड्यूटी और वेट लग,करके आज रेट ₹95 प्रति लीटर चल रहा है, अब किसानों को ही तय करना है दोषी कौन है? बैंक लोन में महंगा में गाड़ी खरीदते हैं तो वसूली किसानों से ही करेंगे, होगा ही, मौका का फायदा हर कोई उठाते हैं। अगर चैन हार्वेस्टर से नहीं करवाएंगे तो किसानों कुछ नहीं मिलेगा,

युवा किसान नेताgolden kumar यही किसानों को सलाह देते हैं छोटे किसान हैं 3,एकड़ तक जमीन है तो बिल्कुल बैल से किसानी करें बिल्कुल हो सकता है डीजल का रेट लगातार महंगा हो रहा है और उसका भी घंटा लगातार बढ़ रहा है और किसानी की लागत लगातार बढ़ रही है और बचत हो नहीं रहा है। बैल केवल घास खाता है और घास बिल्कुल मुफ्त में मिलता है।

गोल्डन कुमार के पास भी ट्रैक्टर है और किसान लोग अगर काम भी कर दिए हैं तो उसका पेमेंट कई सालों का अटका हुआ है भुगतान करते ही नहीं, तुम्हारा ट्रैक्टर पुराना हो जाएगा तो किसान लोग अन्य नया ट्रैक्टर वाला से अपना काम करवा देते हैं और कुछ दिन के बाद उनके साथ ही ऐसा ही कई किसान करते हैं। किसान लोग भुगतान विलंब करते हैं और बहुत वसूली में दिक्कत आता है। इसलिए कई किसान ट्रैक्टर वाले किसान, किराया, में खेती करने वाला काम लगातार छोड़ रहे हैं।

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