मुख्यमंत्री निवास तक पैदल यात्रा, 2018 के बाद अब 2023 में भी।

छत्तीसगढ़ के वनांचल क्षेत्र जिला गरियाबंद से विशेष पिछड़ी जनजाति समाज कमार भुंजिया समाज के लोगों द्वारा मुख्यमंत्री निवास स्थल तक पैदल मार्च कर रहे हैं। उनका मांग है चतुर्थ श्रेणी में सीधी भर्ती एवं वन पट्टा अधिकार।। गौरतलब है कि कमार भुजिया की समाज पिछले 2018 में पूर्व रमन सिंह सरकार के समय भी पदयात्रा किए थे। पिछले भाजपा सरकार से भी असंतुष्ट हुए थे, वर्तमान कांग्रेस सरकार से भी नाराजगी जाहिर कर रहे हैं, अब कमार समाज के लोग भी उच्च शिक्षा कर रहे हैं फिर भी बेरोजगारी छाई हुई है एवं नौकरी नहीं मिल पा रहा है। स्थानीय जिला प्रशासन से कई बार एप्लीकेशन करने के बाद ही कोई सुनवाई नहीं हुआ है। अब इसे सीधे नाराज होकर के मुख्यमंत्री निवास की ओर सीधे पैदल मार्च की ओर निकले हैं। पहले से ही आदिवासी पिछड़ी जनजाति समाज कांग्रेस के परंपरागत वोट रहे हैं। आने वाले विधानसभा चुनाव है इनकी समाज की एकजुटता दिखाई दे रही है इनकी नाराजगी आने वाले विधानसभा चुनाव को प्रभावित कर सकती है। कमार समाज के प्रमुख युवा नेता, नवातु राम कमार, के नेतृत्व में पदयात्रा चल रही है। उनको प्रदेश कांग्रेस सरकार से अपने समाज के विकास के लिए उम्मीद है। पिछड़ी जनजाति समाज को विकास के लिए इन को मुख्यधारा में लाने के लिए सेवा के कार्य में नौकरी एवं वन अधिकार पट्टा की उम्मीद है ताकि आर्थिक विकास हो सके।

  • विशेष पिछड़ी जनजाति कमार भुजिंया समाज ऐसे जगह में निवास करती है, आज भी यह समाज काफी पिछड़ा हुआ है। डिजिटल इंडिया में बीएसएनएल दूर की बात है यहां जियो का भी नेटवर्क काम नहीं करता।
  • कहते हैं जहां न पहुंचे रवि वहां पहुंचे कैमरा कवि, ऐसे ऐसे जगह में निवास करते हैं जहां किसी का कैमरा नहीं पहुंचता है और पहुंच भी गया तो उनकी बातें शासन तक नहीं पहुंचती है।
  • कमार भुजिया समाज ऐसे जगह निवास करते हैं जहां पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय राजीव गांधी पहुंचे थे लेकिन उनके जयंती मना दिए,उसी दिन बस चहल-पहल रहती है बाकी दिन उनका समाज पर ज्यादा फोकस नहीं होता।
  • चतुर्थ श्रेणी में सीधी भर्ती का मांग है, कोई बड़ा पद का भी मांग नहीं है, उनके पास शिक्षा कहीं ज्यादा है और मांग बिल्कुल चतुर्थ श्रेणी का कर रहे हैं।
  • वनांचल में रहने वाले समाज का विकास जरूरी है।
  • ग्लोबल न्यूज के संपादक गोल्डन कुमार, कमार भुजिया समाज के कम से कम 60 परसेंट भाषा बोली समझ जाते हैं। क्योंकि उनके पास में ही रहते हैं। उनके भावनाएं और मनोविज्ञान को भी अच्छे से जानते हैं।
  • कमार भुंजिया समाज अब अपने हक और अधिकार के लिए जागृत हो रहे हैं यह कम से कम समाज के लिए अच्छी बात है।

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