आश्वासन नहीं यकीन चाहिए?#पंचायत सचिव।

छत्तीसगढ़ पंचायत कर्मी पंचायत सचिव लगातार अपने एक सूत्रीय मांग जिसमें मुख्य शासकीय करण करने की मांग पर 16 मार्च से लगातार धरने पर हैं,, सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार सरकार इसमें शासकीय करण करने संबंधी फैसला करने के लिए विचार कर रही है। विधायकों एवं कई मंत्रियों ने इस पर पहले से ही सहमति दे चुके हैं। एवं शासकीय करण करने में ज्यादा बजट की भी जरूरत नहीं है। आने वाला समय में विधानसभा चुनाव है और पंचायत कर्मी सीधे पंचायत स्तर से जनता से सीधे संपर्क में रहते हैं। अगर पंचायत कर्मी को किसी भी प्रकार का कार्यवाही करते हैं, तो पंचायत कर्मी सीधे पंचायत से आम जनता के बीच संपर्क में रहते हैं इसमें सरकार के खिलाफ माहौल गलत भी जा सकता है। पंचायत कर्मी भी सामूहिक रूप से अब आश्वासन नहीं अब भरोसा और आदेश चाहिए शासकीय करण का इस पर अड़े हुए हैं। कई पंचायत कर्मी अब रिटायरमेंट की उम्र में आ गए हैं। पंचायत कर्मी को भी मालूम है ,अगर चुनाव से पहले यह नहीं हो पाया तो चुनाव के बाद इस मुद्दे को तीन-चार साल तक तो देखते ही नहीं। उनको ऐसे ही आश्वासन देकर टाल दिया जाता है इससे पहले भी हो चुका है इससे पहले भी पंचायत कर्मी हड़ताल पर थे, बस पंचायत कर्मी के शासकीय करण में एक पेंच है वह है उनका नियुक्ति किस प्रकार का हुआ है। पंचायत कर्मी का नियुक्ति पंचायत स्तर पर एवं जिला स्तर पर होता है। अब इसमें आरक्षण संबंधी प्रक्रिया को देख करके संख्या को मिलान करके सरकार इसमें फैसला भी कर सकती है। एवं पंचायत विभाग से मनरेगा के कर्मचारी इंजीनियर एवं रोजगार सहायक अपने वेतन वृद्धि मांग के लिए लगातार सोशल मीडिया के माध्यम से अपना उपस्थिति दर्ज करा रहे हैं लेकिन अभी तक उन लोग का हड़ताल पर कब जाएंगे या फैसला अभी तक नहीं आया है। जिनका जो भी मांग है अभी नहीं तो 5 साल तक 4 साल तक इंतजार कर सकते हैं क्योंकि अभी नहीं हुआ तो आप इंतजार के अलावा कुछ नहीं कर सकते क्योंकि आने वाले समय में चुनाव है।

कई सालों से पंचायत कर्मी सेवा कर रहे हैं उनको शासकीय करण कर देने से उनके आत्मविश्वास में वृद्धि होगी। उनका मांग एक प्रकार से जायज भी है क्योंकि, क्योंकि शासन के सभी योजनाओं को आम जनता तक पहुंचाने का काम करते हैं। जहां सरकार और शासन पहुंच नहीं सकती वहां पर पंचायत सचिव पहुंचकर काम करते हैं। महात्मा गांधी का ग्राम स्वराज का सपना तभी पूरा हो सकता है जब उनके कार्य कर रहे कर्मचारियों को शासकीय करण का शासकीय कर्मचारियों का जितना लाभ मिलना है उतना मिले। क्योंकि पंचायत स्तर पर काम तो शासन का ही करते हैं।

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