लो वोल्टेज के लिए जिम्मेदार कौन?#श्री गुरु इलेक्ट्रिकल्स।

छत्तीसगढ़ में एवं जिला गरियाबंद,अधिकतर रवि में 90 परसेंट खेत रकबा में अधिकतर धान का खेती किया जाता है। वाटर लेवल गिरने के साथ-वोल्टेज की भी समस्या समय-समय पर खबरें आती हैं। शासन और प्रशासन किसानों को फसल चक्र अपनाने की प्रेरित नहीं कर पा रहे हैं बिल्कुल फेल दिखाई देते हैं। प्रेरित करने से नहीं होगा प्रेरित तो पहले से ही हो रहा है दुल्हन ही दहेज है पर लोग समझते कहां है दहेज आज भी चलता है और दहेज के कारण कई मामले आते ही हैं विवादित मामले। उदाहरण के लिए ग्लोबल वार्मिंग एवं प्रदूषण कम करने के लिए दिल्ली सरकार ने फैसला लियाआरडी वन आप अपना गाड़ी 1 दिन नंबर के हिसाब से नहीं चलाएंगे जिसका नंबर रहेगा वही चलाएंगे। बाकी दिन आप पब्लिक ट्रांसपोर्ट का उपयोग करेंगे। या तो एग्रीकल्चर में भी हो सकता है पर कर नहीं पा रहे हैं। भारत के किसान अधिकतर भगवान भरोसे हैं डैम जो है जल संसाधन विभाग द्वारा किसानों के द्वारा रवि में धान की फसल लेने के लिए मांग करते हैं और एग्रीमेंट में यही रहता है धान के अलावा दूसरा फसल लेंगे पर किसान लोग धान के अलावा दूसरा फसल लेने को नहीं मानते। फिर जून और जुलाई के महीने में बारिश नहीं होने के कारण किसान काफी प्रभावित होते हैं क्योंकि डैम के पास स्टॉक पानी नहीं रहता। एवं नलकूप में भूमिगत जल प्रभावित होती है वाटर लेवल बहुत नीचे चला जाता है नीचे से पानी निकालने पर विद्युत खपत ज्यादा करती है। मोटर को बहुत लोड पड़ता है। एवं धान के फसल में अधिक पानी की आवश्यकता होती है। क्षेत्र में अधिकतर समस्या वोल्टेज की समस्या फरवरी-मार्च अप्रैल तक की होती है क्योंकि इस समय धान के साथ-साथ गर्मी के दिनों में कूलर पंखा एयर कंडीशनर सब चीजों के लिए विद्युत आपूर्ति करना काफी बिजली विभाग के लिए काफी संघर्ष समय रहता है। अर्थशास्त्र पहले यही कहती थी मनुष्य की मुख्य आवश्यकता रोटी कपड़ा और मकान है अब उसमें बिजली भी जुड़ गया है क्योंकि बिजली के बिना कोई कार्य संभव नहीं है। आप किसी को बाध्य नहीं कर सकते कि आप अपना कूलर एयर कंडीशनर बंद करो। गर्मी के दिनों में सब को राहत के लिए बिजली जरूरी है पानी जरूरी है। सरकार किसानों के लिए पॉलिसी बना सकती है आप पर बोरवेल नलकूप खुदाई से पहले संबंधित विभाग से अनुमति का बनाना चाहिए। एवं बिजली विभाग से कि आप के पास विद्युत आपूर्ति अभी ट्रांसफार्मर में क्षमता है या नहीं। क्योंकि लाइन अभी फिलहाल 33 11kv है। का क्षमता उतना ही है लेकिन उपयोग की क्षमता लगातार बढ़ रही है। पहले यह चीजें में दिक्कत नहीं आता था कहीं-कहीं पर सुनने को आता था पर अब लो वोल्टेज की समस्या आने वाला समय के लिए बहुत कठिनाई का समय रह सकता है। 1hp में लगभग 746 वाट होता है क्षेत्र में अधिकतर 3 एचपी का मोटर है। 3 एचपी का मोटर। उसका लोड लगभग 2000 वाट। वोल्ट × एंपियर करके देखेंगे तो, अच्छे क्षमता वाले मोटर 3 एचपी का मोटर अधिक से अधिक 5 से 6 एंपियर लोड लेती है। पर कई मोटर ऐसे हैं अधिक बिजली खपत अधिक करते हैं ऐसे मोटर को प्रतिबंध करना उचित है। मोटर का एंपियर बढ़ेगा मतलब बिजली अधिक लोड लेगी और बिजली खपत अधिक होगी। इसमें कई प्रकार के तकनीकी ध्यान देने की आवश्यकता है। का मूल्यांकन यूनिट से होता है आप का मोटर कितना यूनिट खपत कर रहा है या देखने के लिए। किलोवाट से घंटा एंपियर को गुणित कर देंगे तो वह निकल जाएगा। उदाहरण के लिए 3 एचपी का मोटर 2000 किलो वाट का है तो वह, मोटर 6 एंपियर लोड ले रही है, एक घंटा में 3 एचपी का मोटर 12 यूनिट बिजली खपत कर रही है। अच्छे ब्रांडेड मोटर के लिए हैं जो कम खपत कर रहा है। दुनिया के अन्य देश एवं पूरी दुनिया यही कहती है पानी एवं बिजली बचाओ आने वाला पीढ़ी के लिए पर ऐसा दिखाई जमीनी स्तर पर नहीं देता है। पृथ्वी पर 71 परसेंट पानी है मात्र एक परसेंट पानी उपयोग के लिए है। बाकी समुद्र में है। जल ही जीवन है जल का सदुपयोग करें और बिजली अनमोल है। यह जो विचारधारा है ग्लोबल न्यूज़ के संपादक गोल्डन कुमार का निजी विचारधारा है इसमें व्यक्तिगत तौर पर टीका टिप्पणी करने की कोशिश ना करें। एलपीजी सिलेंडर गैस के दाम बढ़ जाने से अधिकतर लोग विद्युत इलेक्ट्रिक हीटर का उपयोग कर रहे हैं जो कुछ सेकंड में 2000 किलो वाट तक बढ़ जाता है और बिजली खपत अधिक करती है ऐसे ऐसे उपकरण को लेने के लिए बिजली विभाग का परमिशन एवं विद्युत कनेक्शन में लोड बढ़ाने का प्रावधान का नियम बढ़ाना चाहिए आने वाला समय के लिए, पेट्रोल के दाम बढ़ जाने के कारण इलेक्ट्रिक वाहन चार्ज के लिए भी विद्युत इस्तेमाल के लिए विद्युत विभाग के लिए लोड बढ़ाने के लिए एप्लीकेशन करने का नियम बनाना चाहिए। ऐसे उपयोग करने वाले विद्युत उपभोक्ता को चिन्हित करने की आवश्यकता है।

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